🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 707

The Book of Childhood · Entry 707 of 760 · type: चौपाई

देखि राम छबि अति अनुरागीं। प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं।। रही न लाज प्रीति उर छाई। सहज सनेहु बरनि किमि जाई।। भाइन्ह सहित उबटि अन्हवाए। छरस असन अति हेतु जेवाँए।। बोले रामु सुअवसरु जानी। सील सनेह सकुचमय बानी।। राउ अवधपुर चहत सिधाए। बिदा होन हम इहाँ पठाए।। मातु मुदित मन आयसु देहू। बालक जानि करब नित नेहू।। सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू। बोलि न सकहिं प्रेमबस सासू।। हृदयँ लगाइ कुअँरि सब लीन्ही। पतिन्ह सौंपि बिनती अति कीन्ही।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 707 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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