🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 705

The Book of Childhood · Entry 705 of 760 · type: चौपाई

चारिअ भाइ सुभायँ सुहाए। नगर नारि नर देखन धाए।। कोउ कह चलन चहत हहिं आजू। कीन्ह बिदेह बिदा कर साजू।। लेहु नयन भरि रूप निहारी। प्रिय पाहुने भूप सुत चारी।। को जानै केहि सुकृत सयानी। नयन अतिथि कीन्हे बिधि आनी।। मरनसीलु जिमि पाव पिऊषा। सुरतरु लहै जनम कर भूखा।। पाव नारकी हरिपदु जैसें। इन्ह कर दरसनु हम कहँ तैसे।। निरखि राम सोभा उर धरहू। निज मन फनि मूरति मनि करहू।। एहि बिधि सबहि नयन फलु देता। गए कुअँर सब राज निकेता।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 705 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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