🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 701

The Book of Childhood · Entry 701 of 760 · type: चौपाई

पुरबासी सुनि चलिहि बराता। बूझत बिकल परस्पर बाता।। सत्य गवनु सुनि सब बिलखाने। मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने।। जहँ जहँ आवत बसे बराती। तहँ तहँ सिद्ध चला बहु भाँती।। बिबिध भाँति मेवा पकवाना। भोजन साजु न जाइ बखाना।। भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठई जनक अनेक सुसारा।। तुरग लाख रथ सहस पचीसा। सकल सँवारे नख अरु सीसा।। मत्त सहस दस सिंधुर साजे। जिन्हहि देखि दिसिकुंजर लाजे।। कनक बसन मनि भरि भरि जाना। महिषीं धेनु बस्तु बिधि नाना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 701 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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