🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 685

The Book of Childhood · Entry 685 of 760 · type: चौपाई

जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी।। कहि न जाइ कछु दाइज भूरी। रहा कनक मनि मंडपु पूरी।। कंबल बसन बिचित्र पटोरे। भाँति भाँति बहु मोल न थोरे।। गज रथ तुरग दास अरु दासी। धेनु अलंकृत कामदुहा सी।। बस्तु अनेक करिअ किमि लेखा। कहि न जाइ जानहिं जिन्ह देखा।। लोकपाल अवलोकि सिहाने। लीन्ह अवधपति सबु सुखु माने।। दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा। उबरा सो जनवासेहिं आवा।। तब कर जोरि जनकु मृदु बानी। बोले सब बरात सनमानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 685 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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