🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 679

The Book of Childhood · Entry 679 of 760 · type: चौपाई

जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी।। सुजसु सुकृत सुख सुदंरताई। सब समेटि बिधि रची बनाई।। समउ जानि मुनिबरन्ह बोलाई। सुनत सुआसिनि सादर ल्याई।। जनक बाम दिसि सोह सुनयना। हिमगिरि संग बनि जनु मयना।। कनक कलस मनि कोपर रूरे। सुचि सुंगध मंगल जल पूरे।। निज कर मुदित रायँ अरु रानी। धरे राम के आगें आनी।। पढ़हिं बेद मुनि मंगल बानी। गगन सुमन झरि अवसरु जानी।। बरु बिलोकि दंपति अनुरागे। पाय पुनीत पखारन लागे।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 679 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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