🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 673

The Book of Childhood · Entry 673 of 760 · type: चौपाई

समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए। सादर सतानंदु सुनि आए।। बेगि कुअँरि अब आनहु जाई। चले मुदित मुनि आयसु पाई।। रानी सुनि उपरोहित बानी। प्रमुदित सखिन्ह समेत सयानी।। बिप्र बधू कुलबृद्ध बोलाईं। करि कुल रीति सुमंगल गाईं।। नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा।। तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं। बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं।। बार बार सनमानहिं रानी। उमा रमा सारद सम जानी।। सीय सँवारि समाजु बनाई। मुदित मंडपहिं चलीं लवाई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 673 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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