🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 667

The Book of Childhood · Entry 667 of 760 · type: चौपाई

मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं। करि बैदिक लौकिक सब रीतीं।। मिलत महा दोउ राज बिराजे। उपमा खोजि खोजि कबि लाजे।। लही न कतहुँ हारि हियँ मानी। इन्ह सम एइ उपमा उर आनी।। सामध देखि देव अनुरागे। सुमन बरषि जसु गावन लागे।। जगु बिरंचि उपजावा जब तें। देखे सुने ब्याह बहु तब तें।। सकल भाँति सम साजु समाजू। सम समधी देखे हम आजू।। देव गिरा सुनि सुंदर साँची। प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची।। देत पाँवड़े अरघु सुहाए। सादर जनकु मंडपहिं ल्याए।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 667 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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