🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 658

The Book of Childhood · Entry 658 of 760 · type: चौपाई

जेहिं बर बाजि रामु असवारा। तेहि सारदउ न बरनै पारा।। संकरु राम रूप अनुरागे। नयन पंचदस अति प्रिय लागे।। हरि हित सहित रामु जब जोहे। रमा समेत रमापति मोहे।। निरखि राम छबि बिधि हरषाने। आठइ नयन जानि पछिताने।। सुर सेनप उर बहुत उछाहू। बिधि ते डेवढ़ लोचन लाहू।। रामहि चितव सुरेस सुजाना। गौतम श्रापु परम हित माना।। देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं।। मुदित देवगन रामहि देखी। नृपसमाज दुहुँ हरषु बिसेषी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 658 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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