🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 655

The Book of Childhood · Entry 655 of 760 · type: चौपाई

केकि कंठ दुति स्यामल अंगा। तड़ित बिनिंदक बसन सुरंगा।। ब्याह बिभूषन बिबिध बनाए। मंगल सब सब भाँति सुहाए।। सरद बिमल बिधु बदनु सुहावन। नयन नवल राजीव लजावन।। सकल अलौकिक सुंदरताई। कहि न जाइ मनहीं मन भाई।। बंधु मनोहर सोहहिं संगा। जात नचावत चपल तुरंगा।। राजकुअँर बर बाजि देखावहिं। बंस प्रसंसक बिरिद सुनावहिं।। जेहि तुरंग पर रामु बिराजे। गति बिलोकि खगनायकु लाजे।। कहि न जाइ सब भाँति सुहावा। बाजि बेषु जनु काम बनावा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 655 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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