🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 638

The Book of Childhood · Entry 638 of 760 · type: चौपाई

मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा। बार बार पद रज धरि सीसा।। कौसिक राउ लिये उर लाई। कहि असीस पूछी कुसलाई।। पुनि दंडवत करत दोउ भाई। देखि नृपति उर सुखु न समाई।। सुत हियँ लाइ दुसह दुख मेटे। मृतक सरीर प्रान जनु भेंटे।। पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाए। प्रेम मुदित मुनिबर उर लाए।। बिप्र बृंद बंदे दुहुँ भाईं। मन भावती असीसें पाईं।। भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा। लिए उठाइ लाइ उर रामा।। हरषे लखन देखि दोउ भ्राता। मिले प्रेम परिपूरित गाता।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 638 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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