🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 636

The Book of Childhood · Entry 636 of 760 · type: चौपाई

निज निज बास बिलोकि बराती। सुर सुख सकल सुलभ सब भाँती।। बिभव भेद कछु कोउ न जाना। सकल जनक कर करहिं बखाना।। सिय महिमा रघुनायक जानी। हरषे हृदयँ हेतु पहिचानी।। पितु आगमनु सुनत दोउ भाई। हृदयँ न अति आनंदु अमाई।। सकुचन्ह कहि न सकत गुरु पाहीं। पितु दरसन लालचु मन माहीं।। बिस्वामित्र बिनय बड़ि देखी। उपजा उर संतोषु बिसेषी।। हरषि बंधु दोउ हृदयँ लगाए। पुलक अंग अंबक जल छाए।। चले जहाँ दसरथु जनवासे। मनहुँ सरोबर तकेउ पिआसे।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 636 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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