🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 632

The Book of Childhood · Entry 632 of 760 · type: चौपाई

कनक कलस भरि कोपर थारा। भाजन ललित अनेक प्रकारा।। भरे सुधासम सब पकवाने। नाना भाँति न जाहिं बखाने।। फल अनेक बर बस्तु सुहाईं। हरषि भेंट हित भूप पठाईं।। भूषन बसन महामनि नाना। खग मृग हय गय बहुबिधि जाना।। मंगल सगुन सुगंध सुहाए। बहुत भाँति महिपाल पठाए।। दधि चिउरा उपहार अपारा। भरि भरि काँवरि चले कहारा।। अगवानन्ह जब दीखि बराता।उर आनंदु पुलक भर गाता।। देखि बनाव सहित अगवाना। मुदित बरातिन्ह हने निसाना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 632 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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