🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 628

The Book of Childhood · Entry 628 of 760 · type: चौपाई

बनइ न बरनत बनी बराता। होहिं सगुन सुंदर सुभदाता।। चारा चाषु बाम दिसि लेई। मनहुँ सकल मंगल कहि देई।। दाहिन काग सुखेत सुहावा। नकुल दरसु सब काहूँ पावा।। सानुकूल बह त्रिबिध बयारी। सघट सवाल आव बर नारी।। लोवा फिरि फिरि दरसु देखावा। सुरभी सनमुख सिसुहि पिआवा।। मृगमाला फिरि दाहिनि आई। मंगल गन जनु दीन्हि देखाई।। छेमकरी कह छेम बिसेषी। स्यामा बाम सुतरु पर देखी।। सनमुख आयउ दधि अरु मीना। कर पुस्तक दुइ बिप्र प्रबीना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 628 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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