🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 618

The Book of Childhood · Entry 618 of 760 · type: चौपाई

भूप भरत पुनि लिए बोलाई। हय गय स्यंदन साजहु जाई।। चलहु बेगि रघुबीर बराता। सुनत पुलक पूरे दोउ भ्राता।। भरत सकल साहनी बोलाए। आयसु दीन्ह मुदित उठि धाए।। रचि रुचि जीन तुरग तिन्ह साजे। बरन बरन बर बाजि बिराजे।। सुभग सकल सुठि चंचल करनी। अय इव जरत धरत पग धरनी।। नाना जाति न जाहिं बखाने। निदरि पवनु जनु चहत उड़ाने।। तिन्ह सब छयल भए असवारा। भरत सरिस बय राजकुमारा।। सब सुंदर सब भूषनधारी। कर सर चाप तून कटि भारी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 618 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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