🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 614

The Book of Childhood · Entry 614 of 760 · type: चौपाई

कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना।। समाचार सब लोगन्ह पाए। लागे घर घर होने बधाए।। भुवन चारि दस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।। सुनि सुभ कथा लोग अनुरागे। मग गृह गलीं सँवारन लागे।। जद्यपि अवध सदैव सुहावनि। राम पुरी मंगलमय पावनि।। तदपि प्रीति कै प्रीति सुहाई। मंगल रचना रची बनाई।। ध्वज पताक पट चामर चारु। छावा परम बिचित्र बजारू।। कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब दधि अच्छत माला।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 614 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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