🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 608

The Book of Childhood · Entry 608 of 760 · type: चौपाई

सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।। देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा।। राजन रामु अतुलबल जैसें। तेज निधान लखनु पुनि तैसें।। कंपहि भूप बिलोकत जाकें। जिमि गज हरि किसोर के ताकें।। देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।। दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी।। सभा समेत राउ अनुरागे। दूतन्ह देन निछावरि लागे।। कहि अनीति ते मूदहिं काना। धरमु बिचारि सबहिं सुख माना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 608 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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