🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 604

The Book of Childhood · Entry 604 of 760 · type: चौपाई

सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।। प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।। तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।। भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।। स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।। पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।। जा दिन तें मुनि गए लवाई। तब तें आजु साँचि सुधि पाई।। कहहु बिदेह कवन बिधि जाने। सुनि प्रिय बचन दूत मुसकाने।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 604 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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