🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 602

The Book of Childhood · Entry 602 of 760 · type: चौपाई

पहुँचे दूत राम पुर पावन। हरषे नगर बिलोकि सुहावन।। भूप द्वार तिन्ह खबरि जनाई। दसरथ नृप सुनि लिए बोलाई।। करि प्रनामु तिन्ह पाती दीन्ही। मुदित महीप आपु उठि लीन्ही।। बारि बिलोचन बाचत पाँती। पुलक गात आई भरि छाती।। रामु लखनु उर कर बर चीठी। रहि गए कहत न खाटी मीठी।। पुनि धरि धीर पत्रिका बाँची। हरषी सभा बात सुनि साँची।। खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।। पूछत अति सनेहँ सकुचाई। तात कहाँ तें पाती आई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 602 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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