🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 594

The Book of Childhood · Entry 594 of 760 · type: चौपाई

अति गहगहे बाजने बाजे। सबहिं मनोहर मंगल साजे।। जूथ जूथ मिलि सुमुख सुनयनीं। करहिं गान कल कोकिलबयनी।। सुखु बिदेह कर बरनि न जाई। जन्मदरिद्र मनहुँ निधि पाई।। गत त्रास भइ सीय सुखारी। जनु बिधु उदयँ चकोरकुमारी।। जनक कीन्ह कौसिकहि प्रनामा। प्रभु प्रसाद धनु भंजेउ रामा।। मोहि कृतकृत्य कीन्ह दुहुँ भाईं। अब जो उचित सो कहिअ गोसाई।। कह मुनि सुनु नरनाथ प्रबीना। रहा बिबाहु चाप आधीना।। टूटतहीं धनु भयउ बिबाहू। सुर नर नाग बिदित सब काहु।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 594 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷