🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 592

The Book of Childhood · Entry 592 of 760 · type: चौपाई

जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानु।। जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी।। बिनय सील करुना गुन सागर। जयति बचन रचना अति नागर।। सेवक सुखद सुभग सब अंगा। जय सरीर छबि कोटि अनंगा।। करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा।। अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमामंदिर दोउ भ्राता।। कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।। अपभयँ कुटिल महीप डेराने। जहँ तहँ कायर गवँहिं पराने।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 592 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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