🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 584

The Book of Childhood · Entry 584 of 760 · type: चौपाई

बंधु कहइ कटु संमत तोरें। तू छल बिनय करसि कर जोरें।। करु परितोषु मोर संग्रामा। नाहिं त छाड़ कहाउब रामा।। छलु तजि करहि समरु सिवद्रोही। बंधु सहित न त मारउँ तोही।। भृगुपति बकहिं कुठार उठाएँ। मन मुसकाहिं रामु सिर नाएँ।। गुनह लखन कर हम पर रोषू। कतहुँ सुधाइहु ते बड़ दोषू।। टेढ़ जानि सब बंदइ काहू। बक्र चंद्रमहि ग्रसइ न राहू।। राम कहेउ रिस तजिअ मुनीसा। कर कुठारु आगें यह सीसा।। जेंहिं रिस जाइ करिअ सोइ स्वामी। मोहि जानि आपन अनुगामी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 584 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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