🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 580

The Book of Childhood · Entry 580 of 760 · type: चौपाई

अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी।। सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना।। बररै बालक एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ।। तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा। अपराधी में नाथ तुम्हारा।। कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं। मो पर करिअ दास की नाई।। कहिअ बेगि जेहि बिधि रिस जाई। मुनिनायक सोइ करौं उपाई।। कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें।। एहि के कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं काह कोपु करि कीन्हा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 580 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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