🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 574

The Book of Childhood · Entry 574 of 760 · type: चौपाई

कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।। माता पितहि उरिन भए नीकें। गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें।। सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।। अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली। तुरत देउँ मैं थैली खोली।। सुनि कटु बचन कुठार सुधारा। हाय हाय सब सभा पुकारा।। भृगुबर परसु देखावहु मोही। बिप्र बिचारि बचउँ नृपद्रोही।। मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े।। अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 574 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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