🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 568

The Book of Childhood · Entry 568 of 760 · type: चौपाई

बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी।। पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।। इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।। देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।। भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी।। सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरें कुल इन्ह पर न सुराई।। बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहूँ पा परिअ तुम्हारें।। कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 568 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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