🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 562

The Book of Childhood · Entry 562 of 760 · type: चौपाई

समाचार कहि जनक सुनाए। जेहि कारन महीप सब आए।। सुनत बचन फिरि अनत निहारे। देखे चापखंड महि डारे।। अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा।। बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू।। अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।। सुर मुनि नाग नगर नर नारी।।सोचहिं सकल त्रास उर भारी।। मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी।। भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 562 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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