🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 558

The Book of Childhood · Entry 558 of 760 · type: चौपाई

खरभरु देखि बिकल पुर नारीं। सब मिलि देहिं महीपन्ह गारीं।। तेहिं अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयसु भृगुकुल कमल पतंगा।। देखि महीप सकल सकुचाने। बाज झपट जनु लवा लुकाने।। गौरि सरीर भूति भल भ्राजा। भाल बिसाल त्रिपुंड बिराजा।। सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिसबस कछुक अरुन होइ आवा।। भृकुटी कुटिल नयन रिस राते। सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते।। बृषभ कंध उर बाहु बिसाला। चारु जनेउ माल मृगछाला।। कटि मुनि बसन तून दुइ बाँधें। धनु सर कर कुठारु कल काँधें।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 558 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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