🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 548

The Book of Childhood · Entry 548 of 760 · type: चौपाई

झाँझि मृदंग संख सहनाई। भेरि ढोल दुंदुभी सुहाई।। बाजहिं बहु बाजने सुहाए। जहँ तहँ जुबतिन्ह मंगल गाए।। सखिन्ह सहित हरषी अति रानी। सूखत धान परा जनु पानी।। जनक लहेउ सुखु सोचु बिहाई। पैरत थकें थाह जनु पाई।। श्रीहत भए भूप धनु टूटे। जैसें दिवस दीप छबि छूटे।। सीय सुखहि बरनिअ केहि भाँती। जनु चातकी पाइ जलु स्वाती।। रामहि लखनु बिलोकत कैसें। ससिहि चकोर किसोरकु जैसें।। सतानंद तब आयसु दीन्हा। सीताँ गमनु राम पहिं कीन्हा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 548 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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