🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 533

The Book of Childhood · Entry 533 of 760 · type: चौपाई

सखि सब कौतुक देखनिहारे। जेठ कहावत हितू हमारे।। कोउ न बुझाइ कहइ गुर पाहीं। ए बालक असि हठ भलि नाहीं।। रावन बान छुआ नहिं चापा। हारे सकल भूप करि दापा।। सो धनु राजकुअँर कर देहीं। बाल मराल कि मंदर लेहीं।। भूप सयानप सकल सिरानी। सखि बिधि गति कछु जाति न जानी।। बोली चतुर सखी मृदु बानी। तेजवंत लघु गनिअ न रानी।। कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा। सोषेउ सुजसु सकल संसारा।। रबि मंडल देखत लघु लागा। उदयँ तासु तिभुवन तम भागा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 533 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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