🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 525

The Book of Childhood · Entry 525 of 760 · type: चौपाई

कहहु काहि यहु लाभु न भावा। काहुँ न संकर चाप चढ़ावा।। रहउ चढ़ाउब तोरब भाई। तिलु भरि भूमि न सके छड़ाई।। अब जनि कोउ माखै भट मानी। बीर बिहीन मही मैं जानी।। तजहु आस निज निज गृह जाहू। लिखा न बिधि बैदेहि बिबाहू।। सुकृत जाइ जौं पनु परिहरऊँ। कुअँरि कुआरि रहउ का करऊँ।। जो जनतेउँ बिनु भट भुबि भाई। तौ पनु करि होतेउँ न हँसाई।। जनक बचन सुनि सब नर नारी। देखि जानकिहि भए दुखारी।। माखे लखनु कुटिल भइँ भौंहें। रदपट फरकत नयन रिसौंहें।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 525 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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