🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 513

The Book of Childhood · Entry 513 of 760 · type: चौपाई

ब्यर्थ मरहु जनि गाल बजाई। मन मोदकन्हि कि भूख बुताई।। सिख हमारि सुनि परम पुनीता। जगदंबा जानहु जियँ सीता।। जगत पिता रघुपतिहि बिचारी। भरि लोचन छबि लेहु निहारी।। सुंदर सुखद सकल गुन रासी। ए दोउ बंधु संभु उर बासी।। सुधा समुद्र समीप बिहाई। मृगजलु निरखि मरहु कत धाई।। करहु जाइ जा कहुँ जोई भावा। हम तौ आजु जनम फलु पावा।। अस कहि भले भूप अनुरागे। रूप अनूप बिलोकन लागे।। देखहिं सुर नभ चढ़े बिमाना। बरषहिं सुमन करहिं कल गाना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 513 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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