🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 497

The Book of Childhood · Entry 497 of 760 · type: चौपाई

घटइ बढ़इ बिरहनि दुखदाई। ग्रसइ राहु निज संधिहिं पाई।। कोक सिकप्रद पंकज द्रोही। अवगुन बहुत चंद्रमा तोही।। बैदेही मुख पटतर दीन्हे। होइ दोष बड़ अनुचित कीन्हे।। सिय मुख छबि बिधु ब्याज बखानी। गुरु पहिं चले निसा बड़ि जानी।। करि मुनि चरन सरोज प्रनामा। आयसु पाइ कीन्ह बिश्रामा।। बिगत निसा रघुनायक जागे। बंधु बिलोकि कहन अस लागे।। उदउ अरुन अवलोकहु ताता। पंकज कोक लोक सुखदाता।। बोले लखनु जोरि जुग पानी। प्रभु प्रभाउ सूचक मृदु बानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 497 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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