🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 495

The Book of Childhood · Entry 495 of 760 · type: चौपाई

हृदयँ सराहत सीय लोनाई। गुर समीप गवने दोउ भाई।। राम कहा सबु कौसिक पाहीं। सरल सुभाउ छुअत छल नाहीं।। सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही। पुनि असीस दुहु भाइन्ह दीन्ही।। सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे।। करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी।। बिगत दिवसु गुरु आयसु पाई। संध्या करन चले दोउ भाई।। प्राची दिसि ससि उयउ सुहावा। सिय मुख सरिस देखि सुखु पावा।। बहुरि बिचारु कीन्ह मन माहीं। सीय बदन सम हिमकर नाहीं।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 495 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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