🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 474

The Book of Childhood · Entry 474 of 760 · type: चौपाई

सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए।। समय जानि गुर आयसु पाई। लेन प्रसून चले दोउ भाई।। भूप बागु बर देखेउ जाई। जहँ बसंत रितु रही लोभाई।। लागे बिटप मनोहर नाना। बरन बरन बर बेलि बिताना।। नव पल्लव फल सुमान सुहाए। निज संपति सुर रूख लजाए।। चातक कोकिल कीर चकोरा। कूजत बिहग नटत कल मोरा।। मध्य बाग सरु सोह सुहावा। मनि सोपान बिचित्र बनावा।। बिमल सलिलु सरसिज बहुरंगा। जलखग कूजत गुंजत भृंगा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 474 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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