🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 464

The Book of Childhood · Entry 464 of 760 · type: चौपाई

देखि राम छबि कोउ एक कहई। जोगु जानकिहि यह बरु अहई।। जौ सखि इन्हहि देख नरनाहू। पन परिहरि हठि करइ बिबाहू।। कोउ कह ए भूपति पहिचाने। मुनि समेत सादर सनमाने।। सखि परंतु पनु राउ न तजई। बिधि बस हठि अबिबेकहि भजई।। कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता। सब कहँ सुनिअ उचित फलदाता।। तौ जानकिहि मिलिहि बरु एहू। नाहिन आलि इहाँ संदेहू।। जौ बिधि बस अस बनै सँजोगू। तौ कृतकृत्य होइ सब लोगू।। सखि हमरें आरति अति तातें। कबहुँक ए आवहिं एहि नातें।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 464 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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