🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 450

The Book of Childhood · Entry 450 of 760 · type: चौपाई

कीन्ह प्रनामु चरन धरि माथा। दीन्हि असीस मुदित मुनिनाथा।। बिप्रबृंद सब सादर बंदे। जानि भाग्य बड़ राउ अनंदे।। कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा।। तेहि अवसर आए दोउ भाई। गए रहे देखन फुलवाई।। स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा।। उठे सकल जब रघुपति आए। बिस्वामित्र निकट बैठाए।। भए सब सुखी देखि दोउ भ्राता। बारि बिलोचन पुलकित गाता।। मूरति मधुर मनोहर देखी। भयउ बिदेहु बिदेहु बिसेषी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 450 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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