🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 446

The Book of Childhood · Entry 446 of 760 · type: चौपाई

बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई।। चारु बजारु बिचित्र अँबारी। मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी।। धनिक बनिक बर धनद समाना। बैठ सकल बस्तु लै नाना।। चौहट सुंदर गलीं सुहाई। संतत रहहिं सुगंध सिंचाई।। मंगलमय मंदिर सब केरें। चित्रित जनु रतिनाथ चितेरें।। पुर नर नारि सुभग सुचि संता। धरमसील ग्यानी गुनवंता।। अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू।। होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 446 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷