🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 444

The Book of Childhood · Entry 444 of 760 · type: चौपाई

चले राम लछिमन मुनि संगा। गए जहाँ जग पावनि गंगा।। गाधिसूनु सब कथा सुनाई। जेहि प्रकार सुरसरि महि आई।। तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए।। हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया।। पुर रम्यता राम जब देखी। हरषे अनुज समेत बिसेषी।। बापीं कूप सरित सर नाना। सलिल सुधासम मनि सोपाना।। गुंजत मंजु मत्त रस भृंगा। कूजत कल बहुबरन बिहंगा।। बरन बरन बिकसे बन जाता। त्रिबिध समीर सदा सुखदाता।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 444 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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