🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 434

The Book of Childhood · Entry 434 of 760 · type: चौपाई

मुनि आगमन सुना जब राजा। मिलन गयऊ लै बिप्र समाजा।। करि दंडवत मुनिहि सनमानी। निज आसन बैठारेन्हि आनी।। चरन पखारि कीन्हि अति पूजा। मो सम आजु धन्य नहिं दूजा।। बिबिध भाँति भोजन करवावा। मुनिवर हृदयँ हरष अति पावा।। पुनि चरननि मेले सुत चारी। राम देखि मुनि देह बिसारी।। भए मगन देखत मुख सोभा। जनु चकोर पूरन ससि लोभा।। तब मन हरषि बचन कह राऊ। मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ।। केहि कारन आगमन तुम्हारा। कहहु सो करत न लावउँ बारा।। असुर समूह सतावहिं मोही। मै जाचन आयउँ नृप तोही।। अनुज समेत देहु रघुनाथा। निसिचर बध मैं होब सनाथा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 434 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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