🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 432

The Book of Childhood · Entry 432 of 760 · type: चौपाई

यह सब चरित कहा मैं गाई। आगिलि कथा सुनहु मन लाई।। बिस्वामित्र महामुनि ग्यानी। बसहि बिपिन सुभ आश्रम जानी।। जहँ जप जग्य मुनि करही। अति मारीच सुबाहुहि डरहीं।। देखत जग्य निसाचर धावहि। करहि उपद्रव मुनि दुख पावहिं।। गाधितनय मन चिंता ब्यापी। हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी।। तब मुनिवर मन कीन्ह बिचारा। प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा।। एहुँ मिस देखौं पद जाई। करि बिनती आनौ दोउ भाई।। ग्यान बिराग सकल गुन अयना। सो प्रभु मै देखब भरि नयना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 432 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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