🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 430

The Book of Childhood · Entry 430 of 760 · type: चौपाई

बंधु सखा संग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।। पावन मृग मारहिं जियँ जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी।। जे मृग राम बान के मारे। ते तनु तजि सुरलोक सिधारे।। अनुज सखा सँग भोजन करहीं। मातु पिता अग्या अनुसरहीं।। जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा।। बेद पुरान सुनहिं मन लाई। आपु कहहिं अनुजन्ह समुझाई।। प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।। आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 430 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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