🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 424

The Book of Childhood · Entry 424 of 760 · type: चौपाई

अगनित रबि ससि सिव चतुरानन। बहु गिरि सरित सिंधु महि कानन।। काल कर्म गुन ग्यान सुभाऊ। सोउ देखा जो सुना न काऊ।। देखी माया सब बिधि गाढ़ी। अति सभीत जोरें कर ठाढ़ी।। देखा जीव नचावइ जाही। देखी भगति जो छोरइ ताही।। तन पुलकित मुख बचन न आवा। नयन मूदि चरननि सिरु नावा।। बिसमयवंत देखि महतारी। भए बहुरि सिसुरूप खरारी।। अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगत पिता मैं सुत करि जाना।। हरि जननि बहुबिधि समुझाई। यह जनि कतहुँ कहसि सुनु माई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 424 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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