🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 422

The Book of Childhood · Entry 422 of 760 · type: चौपाई

एक बार जननीं अन्हवाए। करि सिंगार पलनाँ पौढ़ाए।। निज कुल इष्टदेव भगवाना। पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना।। करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा। आपु गई जहँ पाक बनावा।। बहुरि मातु तहवाँ चलि आई। भोजन करत देख सुत जाई।। गै जननी सिसु पहिं भयभीता। देखा बाल तहाँ पुनि सूता।। बहुरि आइ देखा सुत सोई। हृदयँ कंप मन धीर न होई।। इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा।। देखि राम जननी अकुलानी। प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 422 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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