🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 420

The Book of Childhood · Entry 420 of 760 · type: चौपाई

एहि बिधि राम जगत पितु माता। कोसलपुर बासिन्ह सुखदाता।। जिन्ह रघुनाथ चरन रति मानी। तिन्ह की यह गति प्रगट भवानी।। रघुपति बिमुख जतन कर कोरी। कवन सकइ भव बंधन छोरी।। जीव चराचर बस कै राखे। सो माया प्रभु सों भय भाखे।। भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही।। मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। भजत कृपा करिहहिं रघुराई।। एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा। सकल नगरबासिन्ह सुख दीन्हा।। लै उछंग कबहुँक हलरावै। कबहुँ पालनें घालि झुलावै।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 420 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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