🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 418

The Book of Childhood · Entry 418 of 760 · type: चौपाई

काम कोटि छबि स्याम सरीरा। नील कंज बारिद गंभीरा।। अरुन चरन पकंज नख जोती। कमल दलन्हि बैठे जनु मोती।। रेख कुलिस धवज अंकुर सोहे। नूपुर धुनि सुनि मुनि मन मोहे।। कटि किंकिनी उदर त्रय रेखा। नाभि गभीर जान जेहि देखा।। भुज बिसाल भूषन जुत भूरी। हियँ हरि नख अति सोभा रूरी।। उर मनिहार पदिक की सोभा। बिप्र चरन देखत मन लोभा।। कंबु कंठ अति चिबुक सुहाई। आनन अमित मदन छबि छाई।। दुइ दुइ दसन अधर अरुनारे। नासा तिलक को बरनै पारे।। सुंदर श्रवन सुचारु कपोला। अति प्रिय मधुर तोतरे बोला।। चिक्कन कच कुंचित गभुआरे। बहु प्रकार रचि मातु सँवारे।। पीत झगुलिआ तनु पहिराई। जानु पानि बिचरनि मोहि भाई।। रूप सकहिं नहिं कहि श्रुति सेषा। सो जानइ सपनेहुँ जेहि देखा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 418 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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