🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 416

The Book of Childhood · Entry 416 of 760 · type: चौपाई

धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी।। मुनि धन जन सरबस सिव प्राना। बाल केलि तेहिं सुख माना।। बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरन रति मानी।। भरत सत्रुहन दूनउ भाई। प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई।। स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।। चारिउ सील रूप गुन धामा। तदपि अधिक सुखसागर रामा।। हृदयँ अनुग्रह इंदु प्रकासा। सूचत किरन मनोहर हासा।। कबहुँ उछंग कबहुँ बर पलना। मातु दुलारइ कहि प्रिय ललना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 416 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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