🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 414

The Book of Childhood · Entry 414 of 760 · type: चौपाई

कछुक दिवस बीते एहि भाँती। जात न जानिअ दिन अरु राती।। नामकरन कर अवसरु जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी।। करि पूजा भूपति अस भाषा। धरिअ नाम जो मुनि गुनि राखा।। इन्ह के नाम अनेक अनूपा। मैं नृप कहब स्वमति अनुरूपा।। जो आनंद सिंधु सुखरासी। सीकर तें त्रैलोक सुपासी।। सो सुख धाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा।। बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।। जाके सुमिरन तें रिपु नासा। नाम सत्रुहन बेद प्रकासा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 414 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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