🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 408

The Book of Childhood · Entry 408 of 760 · type: चौपाई

ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा।। सुमनबृष्टि अकास तें होई। ब्रह्मानंद मगन सब लोई।। बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाई। सहज संगार किएँ उठि धाई।। कनक कलस मंगल धरि थारा। गावत पैठहिं भूप दुआरा।। करि आरति नेवछावरि करहीं। बार बार सिसु चरनन्हि परहीं।। मागध सूत बंदिगन गायक। पावन गुन गावहिं रघुनायक।। सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।। मृगमद चंदन कुंकुम कीचा। मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 408 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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