🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 404
The Book of Childhood · Entry 404 of 760 · type: छंद
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।।
लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।
भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी।।
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।
माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता।।
करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।।
ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै।।
उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।।
माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।
कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।।
सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।
यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 404 (छंद) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī
Place in the Mānas
- Entry 404 of 760 in Bāla-Kāṇḍa (Kāṇḍa 1 of 7)
- Verse type: छंद
- Kāṇḍa theme: Maṅgalācaraṇa (the auspicious opening · Gaṇeśa-Sarasvatī-Śiva-Pārvatī-Hari-Hara invocations) · Rāma's līlā in childhood · Viśvāmitra-yajña-protection · Sītā-svayaṁvara at Mithilā · the four brothers' weddings
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