🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 387

The Book of Childhood · Entry 387 of 760 · type: चौपाई

बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा।। मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा।। जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी।। अतिसय देखि धर्म कै ग्लानी। परम सभीत धरा अकुलानी।। गिरि सरि सिंधु भार नहिं मोही। जस मोहि गरुअ एक परद्रोही।। सकल धर्म देखइ बिपरीता। कहि न सकइ रावन भय भीता।। धेनु रूप धरि हृदयँ बिचारी। गई तहाँ जहँ सुर मुनि झारी।। निज संताप सुनाएसि रोई। काहू तें कछु काज न होई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 387 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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