🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 382

The Book of Childhood · Entry 382 of 760 · type: चौपाई

मेघनाद कहुँ पुनि हँकरावा। दीन्ही सिख बलु बयरु बढ़ावा।। जे सुर समर धीर बलवाना। जिन्ह कें लरिबे कर अभिमाना।। तिन्हहि जीति रन आनेसु बाँधी। उठि सुत पितु अनुसासन काँधी।। एहि बिधि सबही अग्या दीन्ही। आपुनु चलेउ गदा कर लीन्ही।। चलत दसानन डोलति अवनी। गर्जत गर्भ स्त्रवहिं सुर रवनी।। रावन आवत सुनेउ सकोहा। देवन्ह तके मेरु गिरि खोहा।। दिगपालन्ह के लोक सुहाए। सूने सकल दसानन पाए।। पुनि पुनि सिंघनाद करि भारी। देइ देवतन्ह गारि पचारी।। रन मद मत्त फिरइ जग धावा। प्रतिभट खौजत कतहुँ न पावा।। रबि ससि पवन बरुन धनधारी। अगिनि काल जम सब अधिकारी।। किंनर सिद्ध मनुज सुर नागा। हठि सबही के पंथहिं लागा।। ब्रह्मसृष्टि जहँ लगि तनुधारी। दसमुख बसबर्ती नर नारी।। आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 382 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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